ग्राहक की इस गलती से कार क्लेम हुआ No Claim/Reject, फिर ऐसे मिला पैसा – Real Case

आज की पोस्ट में आपको बताऊंगा कि कैसे एक ग्राहक की छोटी सी गलती की वजह से उनका क्लेम रिजेक्ट/नो-क्लेम (No Claim) हो गया और फिर कैसे पास हुआ। किसी भी एक्सीडेंट में क्लेम लेना इतना भी आसान नहीं है जितना आम ग्राहक सोचते हैं।

गाड़ी का क्लेम करते वक्त आपको डॉक्यूमेंट से लेकर हर एक पहलू पर ध्यान देना होता है, जरा सी चूक हुई और आपका क्लेम रिजेक्ट भी हो सकता है।

आज की पोस्ट किसी किताबी ज्ञान पर आधारित नहीं है और न ही किसी नियम के बारे में है। यह कहानी जो मैं बता रहा हूँ, यह मेरे वर्कशॉप में घटित हो चुकी है कि कैसे एक ग्राहक ने छोटी सी गलती की और उनका क्लेम सर्वेयर द्वारा नो-क्लेम कर दिया गया।

जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ, यह आपके साथ भी हो सकता है। इसलिए यदि आप कार या बाइक के मालिक हैं, तो पोस्ट को ध्यान से पढ़ें।

ek galti aur car claim reject

ग्राहक की इस गलती से कार क्लेम हुआ No Claim / Reject

एक ग्राहक थे, उनका नाम तो नहीं लूँगा। उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ और फिर वह सभी ग्राहकों की तरह मेरे पास आए और बोले कि "सर, गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है, मुझे क्या करना होगा?"

मैंने उनको क्लेम प्रोसेस समझाई और सभी क्लेम से संबंधित डॉक्यूमेंट मांगे। उन्होंने बारी-बारी से सभी डॉक्यूमेंट हमें दिए और अपनी एक्सीडेंट डिटेल क्लेम फॉर्म में भरवाई और चले गए।

हमने अपने प्रोसेस के तहत मैकेनिक से गाड़ी चेक कराई और फिर उसमें जो भी पार्ट्स डैमेज थे, उनको एस्टीमेट में डाला और क्लेम इंटिमेशन (Claim Intimation) कर दिया गया। उनका एस्टीमेट बना था लगभग ₹4.5 लाख के आसपास, जो कि मेजर डैमेज था।

क्लेम इंटिमेशन के बाद बीमा कंपनी द्वारा सर्वेयर अपॉइंट किया गया प्रोसेस के तहत, और सर्वेयर ने सर्वे किया, सभी डॉक्यूमेंट चेक किए और ग्राहक को कॉल करके एक्सीडेंट की जानकारी ली।

अब ग्राहक ने गलती यह की थी कि एक्सीडेंट हुआ 23 जुलाई को और क्लेम फॉर्म में डेट डाल दी 28 जुलाई। बारिश का समय था तो उसमें जंग लग रही थी, तो 28 तारीख के हिसाब से जब सर्वेयर ने 30 जुलाई को सर्वे किया तो उसे लगा कि 2 दिन में इतनी जंग लगना ठीक नहीं लग रहा है।

उसने मुझसे भी यही बात बोली तो मुझे भी लगा कि सर्वेयर सही कह रहे हैं। उनको शक हुआ और उन्होंने क्लेम को इन्वेस्टिगेशन पर डाल दिया।

इन्वेस्टिगेटर ने जब इस एक्सीडेंट की छानबीन की तो सब साफ सामने आ गया, क्योंकि इन्वेस्टिगेटर स्पॉट पर जाकर आसपास पूछताछ करता है तो उसे सब पता चल जाता है।

जब इन्वेस्टिगेशन पूरा हुआ तो उसमें पाया गया कि एक्सीडेंट डेट गलत है—असली डेट 23 जुलाई है न कि 28 जुलाई। यही बात उसने अपनी रिपोर्ट में भी लिख दी और बीमा कंपनी एवं सर्वेयर को भेज दी।

सर्वेयर ने इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट पढ़ी और हमें एवं ग्राहक को ईमेल किया:

no claim rejection email

"Dear Sir, As per investigation report, insured misrepresented the material fact, which is the breach of utmost good faith and term and condition of policy hence the claim is not admissible as per term and condition of policy."

(प्रिय महोदय, जांच रिपोर्ट के अनुसार, बीमित व्यक्ति ने महत्वपूर्ण तथ्य के बारे में गलत जानकारी दी, जो कि 'परम सद्भाव' (Utmost Good Faith) और पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है; इसलिए पॉलिसी की शर्तों के अनुसार यह दावा स्वीकार्य नहीं है।)

(आप ईमेल का स्क्रीनशॉट भी देख सकते हैं)

फिर जब मैंने ग्राहक को यह जानकारी दी तो वह दंग रह गए और मुझसे बहस भी करने लगे कि "आपकी यहाँ की पॉलिसी है, ऐसे कैसे नो-क्लेम मेरी फाइल हो सकती है?" फिर मैंने उनको समझाया कि आपने एक्सीडेंट की डेट गलत बताई है।

फिर भी उन्होंने मेरी बात न मानकर शिकायत कर दी—बीमा कंपनी की भी की और संबंधित सभी जगह शिकायत कर दी।

फिर इनको 2 से 3 दिन बाद एहसास हुआ कि "मेरी ही गलती थी", फिर वह मेरे पास आए और बोले कि "सर, अब क्या करना है? आप ही कुछ रास्ता बताएं।" फिर मैंने उनको कुछ रास्ते बताए जो आगे दिए हैं।

फिर ऐसे मिला No Claim फाइल को क्लेम

मैंने उनको सबसे पहले सर्वेयर का नंबर दिया कि आप इनसे रिक्वेस्ट करके बात करें कि "सर, गलती से डेट लिख गई है, इसे आप सुधार करें।"

अब इन्होंने सर्वेयर से पहले ही बहस कर ली थी और शिकायत भी कर दी थी, तो उसने मना कर दिया कि "आप बीमा कंपनी में बात करें।" फिर मैंने सर्वेयर से बात की कि "सर, आप कोई रास्ता बताएं", तो उन्होंने बीमा कंपनी के बड़े अधिकारियों के नंबर दिए और बोले कि "आप इनसे एक बार बात करें।"

फिर मैंने इसी केस के सिलसिले में उन सभी से बात और ईमेल किए और बोला कि:

"जब व्यक्ति बीमा कराता है तो वह डैमेज का बीमा होता है, न कि एक्सीडेंट की डेट का इधर-उधर हो जाने का। गाड़ी तो डैमेज है ही, अब डेट यदि गलती से इधर-उधर हो जाए तो सुधर सकती है। यह एक राइटिंग मिस्टेक (Writing Mistake) है और ग्राहक के पास सारे सबूत भी हैं—स्पॉट की फोटोज़ वगैरह सब हैं उस डेट की जिसमें एक्सीडेंट हुआ है। सभी डॉक्यूमेंट भी प्रॉपर हैं और इन्वेस्टिगेटर के हिसाब से केवल डेट ही मिसमैच है, जो सुधार योग्य है।"

फिर बीमा कंपनी ने मेरी बातों पर ध्यान दिया और स्पॉट फोटोज़ आदि मैंने उनको भेजीं, और फिर ग्राहक का नो-क्लेम (No Claim) फाइल क्लेम पास कर दिया गया!

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निष्कर्ष (Conclusion)

तो ग्राहक की इस गलती से कार क्लेम हुआ No Claim, और फिर ऐसे मिला पैसा उसका। इसलिए आप हमेशा सही डॉक्यूमेंट लगाएं और क्लेम फॉर्म में कभी गलती न करें, क्योंकि बीमा कंपनी को छोटी सी भी गलती मिल जाती है तो वह तुरंत ही आपकी फाइल को रिजेक्ट कर सकती है, फिर आप परेशान होते हैं।

एक्सीडेंट क्लेम से संबंधित यदि कोई आपका सवाल हो तो ज़रूर पूछें!

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. क्लेम फॉर्म भरते समय अगर एक्सीडेंट की तारीख गलत लिखा जाए तो क्या क्लेम रिजेक्ट हो सकता है?

Ans: हाँ, एक्सीडेंट की तारीख या समय गलत लिखना बीमा नियमों में "गलत जानकारी देना" (Misrepresentation of Material Fact) माना जाता है। इससे बीमा कंपनी क्लेम को इन्वेस्टिगेशन में डालकर रिजेक्ट कर सकती है।

Q2. एक्सीडेंट की तारीख गलत होने पर नो-क्लेम (No Claim) फाइल को कैसे सुधारा जा सकता है?

Ans: यदि एक्सीडेंट की डेट केवल लिखने की गलती (Writing Mistake) थी, तो आप एक्सीडेंट की असली तारीख के स्पॉट फोटो (Spot Photos), टोइंग रसीद या अन्य सबूतों के साथ बीमा कंपनी के ग्रीवेंस सेल और उच्च अधिकारियों को ईमेल करके सुधार की विनती कर सकते हैं।

Q3. एक्सीडेंट होने के कितने दिनों के अंदर क्लेम की सूचना (Intimation) देनी चाहिए?

Ans: नियमानुसार एक्सीडेंट होने के तुरंत बाद या 24 से 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सूचित कर देना चाहिए। सूचना में बेवजह देरी करने पर भी सर्वेयर क्लेम पर सवाल उठा सकता है।

Q4. क्या सर्वेयर के मना करने के बाद बीमा कंपनी क्लेम पास कर सकती है?

Ans: बिल्कुल! सर्वेयर सिर्फ अपनी रिपोर्ट और सिफारिश भेजता है। क्लेम पास या रिजेक्ट करने का अंतिम अधिकार बीमा कंपनी के क्लेम अप्रूवल डिपार्टमेंट का होता है। यदि आपके पास सही सबूत हैं, तो कंपनी सर्वेयर की रिपोर्ट के बाद भी क्लेम पास कर सकती है।

Q5. इंश्योरेंस क्लेम में Utmost Good Faith (परम सद्भाव) का नियम क्या होता है?

Ans: इसका मतलब है कि बीमित व्यक्ति (गाड़ी मालिक) को बीमा कंपनी से दुर्घटना से जुड़ी कोई भी जानकारी (जैसे समय, स्थान, या कारण) छुपानी या गलत नहीं बतानी चाहिए। गलत जानकारी देना इस नियम का उल्लंघन माना जाता है।

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